चंद्रयान -2 लैंडिंग लाइव अपडेट: चंद्रमा के साथ भारत के ऐतिहासिक प्रयास के लिए उलटी गिनती शुरू

चंद्रयान -2, भारत का चंद्रमा के लिए दूसरा मिशन है, जो कल सुबह चंद्र ध्रुव के पास उतरने के लिए तैयार है। चंद्रयान -2 के लैंडर विक्रम वर्तमान में चंद्रमा के चारों ओर घूम रहे हैं और मध्यरात्रि के तुरंत बाद चंद्र सतह पर अपना वंश शुरू करेंगे। लैंडर विक्रम में छह पहियों वाला रोवर प्रज्ञान है, जो लगभग 14 पृथ्वी दिनों के लिए चंद्र सतह का पता लगाएगा। चंद्रयान -2 मिशन में एक ऑर्बिटर भी शामिल है जो एक वर्ष के लिए चंद्रमा के चारों ओर घूमेगा।

Chandrayaan 2 Soft Landing: चांद की सतह पर चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग आज देर रात (छह-सात सितंबर की मध्य रात्रि) करीब दो बजे करीब होगी। इसके साथ ही भारत चंद्र मिशन (Moon Mission) में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर देगा। हालांकि, ये चुनौती इतनी आसान नहीं है। लैंडिंग के अंतिम 15 मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे। पूरे मिशन की कामयाबी इन अंतिम 15 मिनट पर ही टिकी है। आइये जानतें हैं क्या हैं ये चुनौतियां?

इसरो अध्यक्ष के. सिवन के अनुसार कंट्रोल रूम में वैज्ञानिकों की टीम पूरी एक्यूरेसी से काम कर रही है। चंद्रयान-2 को चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतारना सबसे बड़ी चुनौती है। एक छोटी सी चूक पूरे मिशन को खत्म कर सकती है। उन्‍होंने कहा, ‘जब हम सब कुछ सही पाएंगे तो चंद्रयान-2 को चांद पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी।’ उन्‍होंने बताया कि 7 सितंबर को प्रात: काल 1:55 बजे (छह-सात सितंबर की मध्य रात्रि), लैंडर चंद्रमा के साउथ पोल की सतह पर लैंड करेगा।

चंद्र लैंडिंग से चंद्रयान -2 घंटे की दूरी पर
चंद्रयान -2 चंद्रमा पर उतरने से कुछ ही घंटे दूर है। चंद्रमा पर भारत का दूसरा मिशन, चंद्रयान -2 शनिवार की शुरुआत में अपने लैंडिंग के साथ इतिहास बना देगा – देश ने पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ‘नरम लैंडिंग’ का प्रबंधन नहीं किया है। चंद्रयान -2 भी भारत को चंद्रमा पर रोवर उतारने वाला दुनिया का केवल चौथा देश बना देगा – पहले, अमेरिका, तत्कालीन सोवियत संघ और चीन चंद्रमा पर रोवर उतारे हैं।


चंद्रयान -2 ने इस साल 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लिया था। डेढ़ महीने बाद, चंद्रयान -2, जिसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल है, चंद्रमा के साथ अपने ऐतिहासिक प्रयास के लिए तैयार है।


चंद्रयान के लैंडर, जिसका नाम विक्रम (भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के पिता विक्रम साराभाई के नाम पर है), शनिवार दोपहर 1 बजे के बाद कुछ समय बाद चंद्र सतह पर उतरना शुरू करेंगे। वंश लगभग 15 मिनट लेगा, जिसके अंत में विक्रम चंद्र दक्षिण ध्रुव के पास एक ‘नरम लैंडिंग’ करेगा।
लैंडिंग के कुछ घंटों बाद, छह पहियों वाला रोवर प्रज्ञान को विक्रम लैंडर से तैनात किया जाएगा। प्रज्ञान 14 पृथ्वी दिनों के लिए चंद्रमा की सतह का पता लगाएगा, सतह और उप-सतह के प्रयोगों का प्रदर्शन करेगा। दूसरी ओर, चंद्रयान 2 कक्षा, चंद्र वातावरण का अध्ययन करते हुए, एक वर्ष तक चंद्रमा के चारों ओर घूमती रहेगी।


चन्द्रयान -2 चंद्रमा पर जो प्रयोग करेगा उनमें चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी की मात्रा निर्धारित करने के लिए परीक्षण शामिल हैं। चंद्रयान -2 का उद्देश्य सौर मंडल की उत्पत्ति और विस्तार के जीवन का अध्ययन करना है।


960 करोड़ रुपये का चंद्रयान -2 मिशन 2008 के चंद्रयान -1 मिशन का अनुसरण है, जिसने चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी की पुष्टि करके इतिहास बनाया। चंद्रयान -2 भव्य गगनयान मिशन का भी अग्रदूत है, जो तीन भारतीयों को भारतीय अंतरिक्ष यान पर अंतरिक्ष में भेजेगा।


चंद्रयान-2 की लैंडिंग से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
>>> चंद्रयान 2 का लैंडर विक्रम रात करीब दो बजे दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद दो क्रेटर (गड्डों) मैंजिनस-सी और सिंपेलियस-एन के बीच मौजूद समतल स्थान पर उतरेगा।
>>> चांद से करीब 6 किमी की दूरी से लैंडर 2 मीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह की तरफ बढ़ेगा।
>>> लैण्डिंग के लगभग चार घण्टे बाद विक्रम लैंडर का रैंप खुलेगा और 6 पहियों वाला प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर कदम रखेगा।
>>> बाहर निकलने के बाद सुबह तकरीबन 5:05 बजे प्रज्ञान रोवर का सोलर पैनल खुलेगा, जिससे उसे ऊर्जा मिलेगी।
>>> सोलर पैनल खुलने के पांच मिनट बाद करीब 5:10 बजे प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर चलना शुरू करेगा।

>>> रोवर एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर 14 दिन तक चक्कर लगाएगा।
रोवर चांद पर लगभग 500 मीटर की दूरी तय करेगा, इसमें 2 पेलोड हैं।
>>> 27 किलो के रोवर पर ही पूरे मिशन की जिम्मेदारी है, जो चांद पर चक्कर लगाने के दौरान विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा।
>>> चांद पर किए जाने वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी रोवर, विक्रम लैंडर को भेजेगा।
>>> रोवर से प्राप्त डाटा को लैंडर, ऑर्बिटर को भेजेगा और वहां से वह डाटा धरती पर मौजूद इसरो के कंट्रोल रूम में पहुंचेगा।
>>> रोवर से लैंडर और वहां से ऑर्बिटर होते हुए डाटा को इसरो कंट्रोल रूम तक आने में करीब 15 मिनट का वक्त लगेगा।


अंतिम 15 मिनट पर टिकी है कामयाबी
इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रयान-2 का सफर जैसे-जैसे खत्म हो रहा है, कंट्रोल रूम में मौजूद वैज्ञानिकों की धड़कने बढ़ती जा रही हैं। सात सितंबर की सुबह करीब दो बजे चंद्रयान चांद की सतह को छुएगा। इसके ठीक पहले के अंतिम 15 मिनट पर पूरे मिशन की कामयाबी टिकी हुई है। अगर उन 15 मिनट में सबकुछ ठीक ठाक रहा तो भारत अपने अंतरिक्ष मिशन में इतिहास लिखेगा और अगर थोड़ी भी असावधानी हुई तो सारे मेहनत पर पानी फिर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *