ट्रेड वॉर क्या है, भारतीय बाजार पर इसका असरॽ

दुनिया के दो सबसे ताकतवर मुल्क आमने-सामने हैं. अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली 60 अरब डॉलर की वस्तुओं पर ड्यूटी लगा दी है. पलटवार करते हुए चीन ने भी अमेरिका से आने वाले 3 अरब डॉलर के सामान पर टैक्स लगाने का एलान कर दिया है. अब दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर शुरू हो गया है. ट्रेड वॉर का मतलब क्या है? भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए इन दोनों सवालों के जवाब जानते हैं. जब दो या उससे ज्यादा देश बदले की भावना से एक-दूसरे के लिए व्यापार में अड़चनें पैदा करते हैं तो उसे ट्रेड वॉर यानी व्यापार युद्ध कहा जाता है. इसके लिए एक देश दूसरे देश से आने वाले समान पर टैरिफ या टैक्स लगा देता है या उसे बढ़ा देता है. इससे आयात होने वाली चीजों की कीमत बढ़ जाती हैं, जिससे वे घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाती. इससे उनकी बिक्री घट जाती है. अमेरिका और चीन के बीच यही चीज देखी जा रही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ग्लोबल व्यापार युद्ध का नया शिकार भारत को बनाया है। अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले दिन शुक्रवार को भारत का विशेष व्यापार दर्जा खत्म करके कई संदेश दिए हैं। यह निर्णय बहुत पहले लिए जाने की संभावना थी। इस मुद्दे पर दोनों देशों में एक माह से बातचीत चल रही थी। ट्रम्प के समान मोदी भी राष्ट्रवादी नीतियों पर चलते हैं। इसलिए दोनों में से किसी नेता के जल्द झुकने की संभावना नहीं है। राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए ट्रम्प व्यापार में आक्रामक नीतियां लागू कर अपने समर्थकों को संदेश देना चाहते हैं।

क्या भारत पर भी इसका असर होगाॽ दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव अच्छी खबर नहीं है. विश्वभर के बाजार इससे सहमे हुए हैं. चीन का शंघार्इ कंपोजिट, हांगकांग का हैंगसैंग, जापान का निक्केर्इ तीन फीसदी तक लुढ़क चुके हैं. भारतीय बाजारों में एक फीसदी तक की गिरावट आर्इ है.

जापान, जर्मनी और कोरिया सहित 2017 में लगभग सभी महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा काफी ज्यादा है. व्यापार घाटा तब होता है जब किसी देश को निर्यात होने वाली वस्तुओं का मूल्य उस देश से आ .. भारत सरकार ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि वह देश के हितों को आगे रखेगी। व्यापार और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हमारे सामने कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। भारतीय जनता भी बेहतर जीवन स्तर की आकांक्षा रखती है। सरकार का रुख निर्धारित करने में यह निर्णायक तत्व होगा’। कारोबार में तरजीह का दर्जा खत्म होने से भारत पर बहुत ज्यादा आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने 2018 में अमेरिका को 83.2 अरब डॉलर की वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात किया था। लेकिन, इसमें से केवल 5.6 अरब डॉलर के निर्यात को टैक्स से छूट मिली। इससे कपड़ा, आभूषण और ऑटो पार्ट उद्योग प्रभावित होंगे। 

चीन ने अमेरिका से आयात होने वाले पॉल्ट्री उत्पादों पर 25 फीसदी की दर से टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है. अमेरिकी स्टील पाइप्स, फलों और शराब पर उसने 15 फीसदी टैक्स लगाने का एलान किया है. वह एयरक्राफ्ट, कृषि, टेक्नोलॉजी, शिक्षा इत्यादि क्षेत्रों में भी अमेरिका को मुश्किल में डाल सकता है.

ट्रम्प का फोकस भारत में आयातित हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकल पर लगाए जा रहे भारी टैक्स पर भी है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के कॉलेज के डीन श्रीराम चौलिया कहते हैं, अमेरिका उम्मीद कर रहा है चूंकि भारत में चुनाव हो चुके हैं इसलिए मोदी सब्सिडी पर कुछ कर सकते हैं। इसके साथ ट्रम्प अपने दोबारा निर्वाचन का अभियान शुरू करना चाहते हैं। अभी हाल के महीनों में भारत ने कई आयातित प्रोडक्ट पर टैक्स बढ़ाए हैं। उसने अमेरिकी मेवों, सेब और धातु के सामान पर टैक्स लगाने की धमकी दी है। मोदी को धीमी आर्थिक विकास दर बढ़ाने के लिए कुछ ऐसे मैन्युफैक्चरर और निवेशकों का स्वागत करना पड़ेगा जो ट्रम्प सरकार पर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। भारत-अमेरिका के बीच उत्पन्न हुई कठिन स्थिति में समझौते का रास्ता खोजने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी नए विदेश मंत्री जयशंकर पर भी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *